
1. जिंदगी
जिंदगी की मंजिल का पता होना चाहिए,
बस चलते ही रहते हैं सोचते कभी नहीं ।
हर खुशी का नया अंदाज होता है,
खुशी मिल जाए तो इंसां की तलाश रहती नहीं ।
हर तरफ बोलबाला है तमन्नाओं का,
खामोशी में जो सुकून है वह कहीं मिलता नहीं।
हमने भी चाहा था शांति का एक लम्हा,
पर इंसां जो चाहता है वह हमेशा मिलता नहीं।
जिंदगी की हकीकत किसी समझ आए,
मुझे भी तूने समझाया वरना समझ आती नहीं।
तुम पास हो तो सोचती हूं वक्त भी ठहर जाए,
तेरे बिना भी जिंदगी में सुकून पाती नहीं ।
जिंदगी में मुस्कुराने का हुनर तो सीखिए,
वरना खुशी के लम्हों में भी हंसी आती नहीं।
2. तुम्हारा प्रेम
एक दुआ थी खुदा से जो मेरी,
हर शिकायत मेरी भूल गई बस खुशियां रह गई ।
तुम्हारे लहजे की नमी बरकरार है,
वह नमी भी मेरे लिए तवज्जो बन गई।
तुम्हारी आंखों में मंजिल का सपना रहता है,
तुम्हारी मंजिल की मैं एक गवाह है बन गई ।
मैंने खुद को भी तुम्हारे कदमों के इधर-उधर देखा है,
तुम्हारी खामोश नज़रें भी असरदार बन गई ।
वक्त गुजारा तो समझ सब आया है,
मेरी हंसी भी तुम्हारा सफर बन गई।
तुम्हारे अरमान भी फूलों की तरह महकते हैं,
तुम्हारे हंसने से मेरी खुशी भी शरमा गई ।
तुम्हारी गैर मौजूदगी का सन्नाटा जो पसरा है,
तुम्हारी सांसों की खुशबू मेरी किस्मत भी पहचान गई।
3. ख्वाहिशें
अपनी ही उलझी राहों का तमाशा बन गए,
जिधर सब जाते हैं उधर मैं जाती नहीं।
सब कुछ हुआ तो भी क्या ढूंढती निगाहें,
कुछ ख्वाब हवाओं में उन्हें मैं समेटने जाती नहीं ।
सपनों के दरवाजे अटकते रह गए,
पर जो नहीं मिला उसे में खड़काने जाती नहीं ।
वक्त ने जो दिया वह कीमती बन गया,
हर कदम पर मैं ख्वाहिश बहकाने जाती नहीं।
आंखों में बसी थी कुछ नायाब ख्वाहिशें,
तुम्हारी हंसी में खोई मेरी ख्वाहिशें
कहीं भटकने जाती नहीं ।
सितारे गुनगुनाते हैं हर शाम दास्तान जहां की,
सपनों की राह में तारे गुनगुनाए तो भी बिखरने जाती नहीं।
तुम्हारे किनारे से हर लम्हा खास बन जाता,
तुम्हारे बिना अधूरी हर दास्तां कही जाती नहीं।